Paheliyan in Hindi – पहेलियां दिमागी कसरत का सबसे मज़ेदार तरीका मानी जाती हैं। ये न सिर्फ मनोरंजन करती हैं, बल्कि सोचने की क्षमता, तर्कशक्ति और कल्पना को भी मज़बूत बनाती हैं। खासकर ऐसी पहेलियां जो सुनने में आसान लगती हैं लेकिन उनका जवाब तुरंत समझ नहीं आता, उन्हें “ट्रिकी पहेली” कहा जाता है। “रात में रोती है, दिन में सोती है” जैसी पहेली पहली बार सुनते ही हमें किसी जीव, इंसान या बच्चे की कल्पना की ओर ले जाती है। लेकिन यहीं पर दिमाग चकरा जाता है, क्योंकि जवाब किसी आम सोच से अलग होता है। ऐसी पहेलियां बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी खूब पसंद आती हैं। ये परिवार या दोस्तों के बीच मज़ेदार चर्चा का विषय बन जाती हैं। कई बार सही जवाब पता चलने पर हैरानी भी होती है कि इतना सरल उत्तर हम पहले क्यों नहीं सोच पाए। यही पहेलियों की असली खूबसूरती है, जो सरल शब्दों में गहरी सोच छिपाए होती है।

पहेली का सवाल और सोचने का तरीका
इस पहेली को समझने के लिए सबसे पहले शब्दों पर ध्यान देना ज़रूरी है। “रात में रोती है” का मतलब यह जरूरी नहीं कि कोई सच में रो रहा हो, बल्कि यह किसी आवाज़ या क्रिया का संकेत भी हो सकता है। वहीं “दिन में सोती है” का अर्थ निष्क्रिय या शांत रहने से भी लिया जा सकता है। अक्सर लोग इस पहेली को किसी इंसान, नवजात बच्चे या किसी जानवर से जोड़ देते हैं, लेकिन सही दिशा में सोचने के लिए हमें निर्जीव चीज़ों पर भी ध्यान देना चाहिए। ट्रिकी पहेलियों की खासियत यही होती है कि वे हमारी सामान्य सोच से हटकर जवाब मांगती हैं। अगर हम रोज़मर्रा की चीज़ों पर गौर करें, तो कई ऐसी वस्तुएं मिलती हैं जो रात के समय आवाज़ करती हैं और दिन में शांत रहती हैं।
सही जवाब क्या है?
इस पहेली का जवाब है – माचिस। अब अगर ध्यान से सोचें तो यह जवाब पूरी तरह फिट बैठता है। रात में जब अंधेरा होता है, तो माचिस जलाई जाती है और जलते समय “फुस्स” जैसी आवाज़ करती है, जिसे पहेली में “रोना” कहा गया है। वहीं दिन में रोशनी होने के कारण माचिस आमतौर पर इस्तेमाल नहीं होती और डिब्बे में पड़ी रहती है, यानी “सोती है”। यही वजह है कि यह पहेली सुनने में भले ही किसी जीव से जुड़ी लगे, लेकिन असल में इसका जवाब एक साधारण सी वस्तु है। सही जवाब पता चलने के बाद अक्सर लोग मुस्कुरा देते हैं, क्योंकि उत्तर बिल्कुल सामने होता है, लेकिन दिमाग उसे पकड़ नहीं पाता। यही ट्रिकी पहेलियों की मज़ा और चुनौती दोनों है।
पहेलियां दिमाग के लिए क्यों फायदेमंद हैं?
पहेलियां सिर्फ समय बिताने का साधन नहीं होतीं, बल्कि ये मानसिक विकास में भी मदद करती हैं। जब हम किसी पहेली को हल करने की कोशिश करते हैं, तो हमारा दिमाग अलग-अलग संभावनाओं पर काम करता है। इससे सोचने की क्षमता तेज़ होती है और समस्या सुलझाने का कौशल बेहतर बनता है। बच्चों के लिए पहेलियां सीखने को खेल जैसा बना देती हैं, जबकि बड़ों के लिए यह तनाव कम करने का अच्छा तरीका है।
ऐसी और पहेलियां कैसे सुलझाएं?
अगर आप ऐसी ट्रिकी पहेलियां जल्दी सुलझाना चाहते हैं, तो सबसे पहले जल्दबाज़ी छोड़ें। हर शब्द के अर्थ पर ध्यान दें और यह समझें कि क्या वह शाब्दिक है या प्रतीकात्मक। रोज़मर्रा की चीज़ों को अलग नज़र से देखने की आदत डालें, क्योंकि अधिकतर पहेलियों के जवाब हमारे आसपास ही होते हैं। दोस्तों या परिवार के साथ मिलकर पहेलियां हल करना भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि अलग-अलग सोच नए दृष्टिकोण देती है।
