6 फ़रवरी से 8वें वेतन और DA से सैलरी 3 गुना बढ़ने का दावा DA Hike 8th Pay Commission Salary 2026

DA Hike 8th Pay Commission – केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 6 फ़रवरी से वेतन तीन गुना बढ़ने के दावे ने जबरदस्त चर्चा पैदा कर दी है। सोशल मीडिया और कई न्यूज़ प्लेटफॉर्म पर यह कहा जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग और महंगाई भत्ते (DA) में बड़े बदलाव के साथ सैलरी में ऐतिहासिक उछाल आने वाला है। इन दावों के अनुसार, 2026 से लागू होने वाला नया वेतन ढांचा मौजूदा बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर और डीए मर्जर को मिलाकर कुल वेतन में कई गुना वृद्धि कर सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। फिर भी, कर्मचारी वर्ग इस संभावित बदलाव को लेकर काफी उत्साहित है क्योंकि 7वें वेतन आयोग के बाद महंगाई तेजी से बढ़ी है और वास्तविक आय पर दबाव महसूस किया जा रहा है। ऐसे में 8वें वेतन आयोग से उम्मीद की जा रही है कि वह न सिर्फ वेतन संरचना को तर्कसंगत बनाएगा बल्कि कर्मचारियों की क्रय शक्ति को भी मजबूत करेगा।

_DA Hike 8th Pay Commission
_DA Hike 8th Pay Commission

8वें वेतन आयोग को लेकर क्या हैं दावे

8वें वेतन आयोग को लेकर सबसे बड़ा दावा यह किया जा रहा है कि फिटमेंट फैक्टर में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। मौजूदा समय में 7वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 2.57 है, लेकिन चर्चाओं में इसे बढ़ाकर 3.68 या उससे अधिक किए जाने की बात सामने आ रही है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि डीए को पूरी तरह से बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाएगा, जिससे कुल वेतन अपने आप कई गुना बढ़ जाएगा। 6 फ़रवरी की तारीख को इसलिए अहम बताया जा रहा है क्योंकि इसी दिन से कई बड़े वेतन और पेंशन सुधारों की घोषणा परंपरागत रूप से की जाती रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन तीन गुना बढ़ने का दावा व्यावहारिक रूप से थोड़ा अतिरंजित हो सकता है। फिर भी, यदि फिटमेंट फैक्टर और डीए मर्जर दोनों लागू होते हैं, तो कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल निश्चित रूप से देखने को मिल सकता है।

DA Hike से सैलरी पर कितना असर पड़ेगा

महंगाई भत्ता यानी DA, सरकारी कर्मचारियों की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। वर्तमान में DA दरें महंगाई सूचकांक के आधार पर तय की जाती हैं और साल में दो बार संशोधित होती हैं। यदि 8वें वेतन आयोग के लागू होने से पहले या उसके साथ DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाता है, तो इसका सीधा असर कुल वेतन पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी का बेसिक पे 30,000 रुपये है और उस पर 50 प्रतिशत DA मिलता है, तो मर्जर के बाद नया बेसिक 45,000 रुपये हो सकता है। इसके बाद नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर वेतन की गणना की जाएगी। यही वजह है कि सैलरी तीन गुना बढ़ने जैसे दावे सामने आ रहे हैं। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा, इसलिए अभी इसे केवल संभावित परिदृश्य के रूप में ही देखना चाहिए।

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6 फ़रवरी 2026 की तारीख क्यों मानी जा रही है अहम

6 फ़रवरी 2026 को लेकर इसलिए भी अटकलें तेज हैं क्योंकि यह भारत का गणतंत्र दिवस है और इस दिन से नीतिगत बदलावों को लागू करने की परंपरा रही है। कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार इसी दिन 8वें वेतन आयोग के गठन या उसकी प्रमुख सिफारिशों का संकेत दे सकती है। इसके अलावा, 2026 में 7वें वेतन आयोग की अवधि पूरी होने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे नए आयोग की जरूरत स्वाभाविक हो जाती है। कर्मचारी संगठनों का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए जल्द से जल्द नया वेतन आयोग लागू किया जाए। हालांकि, आधिकारिक घोषणा के बिना किसी भी तारीख को लेकर निश्चित दावा करना जोखिम भरा है।

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क्या सच में सैलरी तीन गुना बढ़ेगी

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई सैलरी तीन गुना बढ़ेगी। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी सरकार के लिए वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखें तो वेतन में अच्छी बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन तीन गुना जैसी वृद्धि दुर्लभ रही है। संभव है कि कुल पैकेज, जिसमें बेसिक पे, डीए और अन्य भत्ते शामिल हों, उसमें बड़ी बढ़ोतरी दिखे और उसी को तीन गुना बढ़ोतरी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा हो। इसलिए कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय सरकार की आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करें। वास्तविक बढ़ोतरी निश्चित रूप से राहत देने वाली हो सकती है, लेकिन दावों को लेकर संतुलित नजरिया रखना जरूरी है।

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Author: Ruth Moore

Ruth MOORE is a dedicated news content writer covering global economies, with a sharp focus on government updates, financial aid programs, pension schemes, and cost-of-living relief. She translates complex policy and budget changes into clear, actionable insights—whether it’s breaking welfare news, superannuation shifts, or new household support measures. Ruth’s reporting blends accuracy with accessibility, helping readers stay informed, prepared, and confident about their financial decisions in a fast-moving economy.

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