Saving Account New Update – भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हालिया फैसले ने देश के करोड़ों खाताधारकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लंबे समय से कम ब्याज दरों से जूझ रहे सेविंग अकाउंट धारकों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में सेविंग अकाउंट पर 7 प्रतिशत से अधिक ब्याज मिलने की संभावना बन सकती है। RBI द्वारा तरलता प्रबंधन, रेपो रेट और बैंकों की फंडिंग लागत से जुड़े संकेतों ने बैंकों को अपनी ब्याज दरों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। फिलहाल ज्यादातर बड़े बैंक 2.5 से 4 प्रतिशत के बीच ब्याज दे रहे हैं, लेकिन स्मॉल फाइनेंस बैंक पहले ही 6 से 7 प्रतिशत तक ब्याज ऑफर कर रहे हैं। ऐसे में आम खाताधारकों को उम्मीद है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ब्याज दरों में इजाफा होगा। यदि बैंक यह बढ़ोतरी लागू करते हैं, तो सेविंग अकाउंट न सिर्फ सुरक्षित रहेगा बल्कि बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प भी बन सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो जोखिम नहीं लेना चाहते।

RBI के फैसले का बैंकों पर सीधा असर
RBI के मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों का सीधा असर बैंकों की लागत और उनकी रणनीतियों पर पड़ता है। जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों या नकदी प्रबंधन में बदलाव करता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत बदल जाती है। हालिया संकेतों से यह साफ हुआ है कि RBI महंगाई को संतुलित रखते हुए अर्थव्यवस्था में पर्याप्त नकदी बनाए रखना चाहता है। इसका फायदा यह हो सकता है कि बैंकों के पास जमा आकर्षित करने की जरूरत बढ़े। जमा बढ़ाने के लिए सबसे आसान तरीका सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ाना होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होती है, तो सेविंग अकाउंट पर 7 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज देना भी संभव हो सकता है।
सेविंग अकाउंट पर 7% ब्याज कितना हकीकत के करीब
हालांकि सेविंग अकाउंट पर 7 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज की बात सुनने में आकर्षक लगती है, लेकिन यह पूरी तरह सभी बैंकों पर लागू हो, ऐसा तुरंत संभव नहीं दिखता। वर्तमान में यह दरें मुख्य रूप से स्मॉल फाइनेंस बैंकों और कुछ डिजिटल बैंकों द्वारा दी जा रही हैं, जहां शर्तें भी जुड़ी होती हैं। बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक अभी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। वे आमतौर पर तभी दरें बढ़ाते हैं जब लंबी अवधि के लिए नीति स्थिर दिखाई दे।
खाताधारकों के लिए क्या हो सकती है सही रणनीति
इस बदलते माहौल में खाताधारकों के लिए जरूरी है कि वे सिर्फ एक बैंक पर निर्भर न रहें। अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और शर्तों की तुलना करना समझदारी होगी। यदि कोई बैंक सेविंग अकाउंट पर ज्यादा ब्याज दे रहा है, तो उसकी न्यूनतम बैलेंस, निकासी नियम और सुरक्षा व्यवस्था को भी जरूर देखना चाहिए। इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा रकम सेविंग अकाउंट में रखने के बजाय कुछ हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों में डालना बेहतर हो सकता है। RBI के फैसले के बाद ब्याज दरों में बदलाव धीरे-धीरे होगा, इसलिए जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए।
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भविष्य में ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत मिलते हैं
भविष्य की बात करें तो RBI की नीति इस बात पर निर्भर करेगी कि महंगाई, वैश्विक बाजार और घरेलू आर्थिक स्थिति किस दिशा में जाती है। यदि अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है और बैंकों को पर्याप्त क्रेडिट डिमांड मिलती है, तो जमा पर ब्याज दरें आकर्षक बनी रह सकती हैं। सेविंग अकाउंट पर 7 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज अभी भले ही सभी के लिए सामान्य न हो, लेकिन यह संकेत जरूर है कि बैंक ग्राहकों को लुभाने के लिए नए ऑफर ला सकते हैं।
