Bank Minimum Balance New Rule – देशभर के बैंक खाताधारकों के लिए मिनिमम बैलेंस को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया गया है, जिसका सीधा असर करोड़ों ग्राहकों पर पड़ेगा। नए नियम के तहत अब बैंकों ने खाते के प्रकार, शाखा के स्थान और ग्राहक की श्रेणी के आधार पर मिनिमम बैलेंस की शर्तों में संशोधन किया है। शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मिनिमम बैलेंस की सीमा अलग-अलग तय की गई है, ताकि ग्राहकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न पड़े। यदि कोई खाताधारक निर्धारित न्यूनतम राशि अपने खाते में नहीं रखता है, तो उस पर पहले की तरह भारी जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि सीमित शुल्क या वैकल्पिक चेतावनी प्रणाली लागू की जाएगी। बैंकों का कहना है कि यह बदलाव वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और आम नागरिकों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़े रखने के उद्देश्य से किया गया है। खासकर वे लोग जो नियमित आय नहीं रखते, उनके लिए यह नियम राहत लेकर आया है।

नए मिनिमम बैलेंस नियम की मुख्य विशेषताएं
नए मिनिमम बैलेंस नियमों के तहत बैंकों ने खाताधारकों को अधिक पारदर्शिता और लचीलापन देने का दावा किया है। अब सेविंग अकाउंट में न्यूनतम राशि खाते की कैटेगरी पर निर्भर करेगी, जैसे बेसिक सेविंग अकाउंट, रेगुलर सेविंग अकाउंट और सैलरी अकाउंट। कई बैंकों ने बेसिक सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता पूरी तरह खत्म कर दी है। वहीं रेगुलर खातों में यह राशि पहले की तुलना में कम रखी गई है। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को विशेष छूट दी गई है।
खाताधारकों पर क्या पड़ेगा असर
इस नए नियम का सबसे बड़ा असर उन खाताधारकों पर पड़ेगा, जो अब तक मिनिमम बैलेंस न रख पाने के कारण बार-बार जुर्माना भरते थे। अब उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिलेगी और खाते को सक्रिय रखना आसान होगा। ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह नियम खास तौर पर फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि वहां नियमित आय का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। इसके साथ ही डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ग्राहक अब बिना जुर्माने के डर के ऑनलाइन लेनदेन कर सकेंगे। हालांकि कुछ प्रीमियम खातों में मिनिमम बैलेंस की शर्तें पहले जैसी ही रह सकती हैं।
नए नियम के तहत जुर्माने में बदलाव
पहले मिनिमम बैलेंस न रखने पर बैंकों द्वारा सीधा जुर्माना काट लिया जाता था, जिससे कई बार खाते का बैलेंस और भी कम हो जाता था। नए नियम के अनुसार अब यह प्रक्रिया अधिक ग्राहक-अनुकूल बना दी गई है। यदि खाते में निर्धारित न्यूनतम राशि नहीं रहती है, तो बैंक पहले एसएमएस या ईमेल के जरिए सूचना देगा। इसके बाद खाताधारक को एक निश्चित समय सीमा दी जाएगी, जिसमें वह बैलेंस पूरा कर सकता है। यदि फिर भी शर्त पूरी नहीं होती है, तभी सीमित शुल्क लगाया जाएगा।
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खाताधारकों को क्या करना चाहिए
नए मिनिमम बैलेंस नियम लागू होने के बाद खाताधारकों के लिए जरूरी है कि वे अपने खाते की जानकारी अपडेट रखें। सबसे पहले अपने बैंक की वेबसाइट, ब्रांच या कस्टमर केयर से यह पता करें कि आपके खाते पर कौन सा मिनिमम बैलेंस नियम लागू होता है। यदि आपका खाता बेसिक सेविंग अकाउंट है, तो आपको बैलेंस की चिंता करने की जरूरत नहीं हो सकती। वहीं अन्य खातों में समय-समय पर बैलेंस की जांच करते रहें।
